नियोनेटोलॉजी और एनआईसीयू


भारत के सबसे बड़े और सबसे व्यापक उपचार प्रदान करने वाले चिकित्सा व्यवसायियों में से एक के रूप में, मणिपाल हॉस्पिटल्स का नियोनेटोलॉजी विभाग बीमार पड़ गए या समय से पहले पैदा हुए नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए अत्याधुनिक न्यूबॉर्न इंटेंसिव केयर यूनिट्स (एनआईसीयू) का संचालन करता है।

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Why Manipal?

मणिपाल हॉस्पिटल्स में, प्रत्येक एनआईसीयू का संचालन विशेषज्ञ नियोनेटोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है, जिनके साथ श्वसन चिकित्सक, नवजात नर्सिंग विशेषज्ञों और रेजिडेंट चिकित्सकों की एक टीम द्वारा सहायोग किया जाता है। टीम की संयुक्त विशेषज्ञता और एनआईसीयू में उपलब्ध उन्नत स्वास्थ्य उपकरण अपने शैशवकाल में जटिलताओं का सामना करने वाले नवजात शिशुओं के जीवन को बचाना सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

Treatment & Procedures

नवजात रक्त आधान

एनआईसीयू में नवजात शिशुओं को रक्त आधान की आवश्यकता पड़ जाना बहुत सामान्य बात होती है। चूंकि नवजात शिशु पहले से ही कमजोर अवस्था में होते हैं, इसलिए उनके शरीर में रक्त संचरण के लिए पर्याप्त रक्त बनाए रखने में नवजात को सहायता करने के लिए अक्सर रक्त आधान की आवश्यकता होती है। इन्ट्रावेनस लाइन के माध्यम से रक्त आधान किया जाता है।

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आधुनिक एनआईसीयू में उपलब्ध नवजात उपचार व्यवस्थाओं तथा सुविधाओं में हुई प्रगति के कारण समय से पहले जन्म लेने वाले, यहाँ तक की 24 सप्ताह तक की गर्भावस्था के बाद तक भी जन्म लेने वाले बच्चों के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। दिसंबर 2018 में, 23 सप्ताह और 3 दिनों की गर्भावस्था के बाद सिर्फ 245 ग्राम का पैदा हुआ एक बच्चा जीवित रहने में सक्षम रह सका था और उसे 5 महीने के बाद हास्पिटल से छुट्टी दे दी गई और उसके स्वस्थ जीवन जीने की उम्मीद है।


कभी-कभी बच्चे पूरी तरह से विकसित शरीर प्रणालियों के बिना पैदा होते हैं, जिससे उनका जीवित रहना मुश्किल हो सकता है। हो सकता है कि फेफड़े सांस लेने में सक्षम नहीं हों, हृदय प्रभावी ढंग से रक्त पंप नहीं कर सकता हो आदि। एनआईसीयू में हाई-टेक उपकरणों की व्यवस्था की गई जो डॉक्टरों के लिए समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं में शरीर प्रणालियों के अविकसितता की क्षतिपूर्ति करना या अनिर्धारित जन्मजात दोषों का निवारण करना संभव कर देते हैं, ये दोनों ऐसी स्थितियाँ हैं जो नवजात के अस्तित्व हेतु खतरा होती हैं।

एनआईसीयू में निदान और उपचार किए जाने वाले सामान्य रोग 

  • एपनिया

  • एनीमिया

  • ब्रोन्कोपल्मोनरी डिसप्लेसिया (बीपीडी)

  • ब्रैडीकार्डिया

  • हाइड्रोसिफ़लस

  • नियोनेटल सेप्सिस

  • पीलिया

  • इंट्रावेंट्रिकुलर रक्तस्राव (आईवीएच)

  • पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (पीडीए)

  • नेक्रोटाइज़िंग एंटरोकोलाइटिस (एनईसी)

  • इनफेंट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (आरडीएस)

  • पेरीवेंट्रिकुलर ल्यूकोमालासिया (पीवीएल)

  • ट्रांजिएंट टेचिपनिया ऑफ दी न्यूबॉर्न मेंनवजात (टीटीएन)

  • रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (आरओपी)

Facilities & Services

एनआईसीयू में उपलब्ध उपकरण और सेवाएं - इनक्यूबेटर बेड (नवजात शिशुओं के लिए इष्टतम स्थितियों को कृत्रिम रूप से विकसित करने के लिए प्रयुक्त) - ऑक्सीजन हुड - नवजात वेंटिलेटर – पुनर्जीवन (रिससिटेशन) – आईवी इन्फ्यूशन - रक्त आधान - प्लाज्मा आधान - नवजात स्वास्थ्य मॉनिटर (बीपी, हृदय गति, तापमान, श्वसन) - बेडसाइड अल्ट्रासाउंड, इकोकार्डियोग्राम - लैक्टेशन सिस्टम - न्यूनतम इनवेसिव नियोनेटल डायग्नोस्टिक किट - ट्रांसपोर्ट इनक्यूबेटर - एंटीबायोटिक उपचार 

एनआईसीयू देखभाल स्तर 

- स्तर 1 देखभाल- 34 या अधिक सप्ताह की गर्भकालीन परिपक्वता वाले 1800 ग्राम से अधिक वजन वाले नवजात शिशुओं के लिए 

- स्तर 2 देखभाल-नवजात शिशुओं के लिए जिनका वजन 1800 ग्राम से कम, लेकिन 1200 ग्राम से अधिक होता है, जिनकी गर्भकालीन परिपक्वता 30 से 34 सप्ताह के बीच होती है। 

- स्तर 3 देखभाल

- उन नवजात शिशुओं के लिए जिनका वजन 1200 ग्राम से कम है और जिनकी गर्भकालीन परिपक्वता 30 सप्ताह से कम है।

FAQ's

The first challenge for the doctors is to incubate the neonate and maintain stability. After this is achieved, the neonate must be examined, diagnosed and treated for any complications that can threaten survivability. Neonatal nurses, respiratory therapists and lactation experts ensure that the neonate is given the right care and nutrition until it is possible to discharge the patient. Visit our neonatology hospital in Bangalore to know more.

If the newborn's body systems are unable to support it sufficiently, NICU admittance becomes necessary. However, sometimes the neonate is admitted to the NICU to be kept under observation because of complications during birth.

  • Early contractions

  • Increased pelvic/abdominal pressure

  • Continuous back pain

  • Premature membrane rupture (water breaks early)

Visit the best neonatology hospital in Bangalore if you are experiencing such symptoms.

There are many factors that can contribute to preterm birth, and even those women with no known risk factors can go into labor prematurely. The best thing to do is to be in regular contact with your healthcare provider and to detect possibilities of preterm birth early on.

Due to the potential for pregnancy complications, it is important to be regular with your doctor and to investigate any unusual symptoms at the earliest.

मणिपाल हास्पिटल्स अपने सभी रोगियों के लिए सर्वोत्तम संभव उपचार सुनिश्चित करने के लिए समर्पित रहकर कार्य करते है। एनआईसीयू में हमारे रोगियों को प्रदान की जाने वाली उच्च गुणवत्तापूर्ण, जीवन रक्षक देखभाल इसका प्रमाण है।

हमारे एनआईसीयू के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें और आज ही हमारे किसी नवजात विशेषज्ञ के साथ अपॉइंटमेंट बुक करें।

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